केंद्रीय बैंकिंग कानून
Reserve Bank of India Act, 1934
अधिनियम वर्ष: 1934 | लागू: 1 अप्रैल 1935उद्देश्य: भारत में केंद्रीय बैंक की स्थापना एवं मुद्रा प्रबंधन के लिए बना यह अधिनियम RBI की शक्तियों, कार्यों और दायित्वों को परिभाषित करता है।
🔍 गहन व्याख्या — यह कानून क्यों बना?
1857 से पहले भारत में कई निजी बैंक मुद्रा जारी करते थे जिससे अव्यवस्था थी। 1913 में Hilton Young Commission ने एक केंद्रीय बैंक की सिफारिश की। फिर 1934 में यह अधिनियम पास हुआ और 1 अप्रैल 1935 को RBI की स्थापना कोलकाता में हुई। शुरुआत में यह निजी बैंक था जिसे 1 जनवरी 1949 को राष्ट्रीयकृत किया गया।
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| स्थापना | 1 अप्रैल 1935, कोलकाता में मुख्यालय (बाद में मुंबई) |
| राष्ट्रीयकरण | 1 जनवरी 1949 को RBI का पूर्ण राष्ट्रीयकरण |
| पूंजी | 5 करोड़ रु. — पूर्णतः केंद्र सरकार द्वारा धारित |
| CRR शक्ति | धारा 42 — वाणिज्यिक बैंकों पर CRR लागू करने की शक्ति |
| नोट जारी | धारा 22 — एकमात्र नोट जारी करने का अधिकार (1 रु. छोड़कर) |
| Repo/Reverse Repo | धारा 17 — बैंक दर एवं खुले बाजार परिचालन |
| विदेशी मुद्रा भंडार | FEMA 1999 के साथ समन्वय में प्रबंधन |
🔍 RBI के मुख्य कार्य — विस्तार से
- नोट जारी करना (Issue of Currency): एकमात्र RBI को Rs.2, Rs.5, Rs.10 से लेकर Rs.2000 तक के नोट जारी करने का अधिकार है। Rs.1 का नोट वित्त मंत्रालय जारी करता है।
- सरकार का बैंकर (Banker to Government): RBI केंद्र और राज्य सरकारों के बैंकिंग कार्य करता है — जैसे कि सरकार की ओर से भुगतान करना और सरकारी ऋण जारी करना।
- बैंकों का बैंक (Banker's Bank): जब किसी बैंक को पैसों की जरूरत होती है, वह RBI से कर्ज लेता है। इसीलिए RBI को "अंतिम ऋणदाता" (Lender of Last Resort) कहते हैं।
- मौद्रिक नीति (Monetary Policy): Repo Rate, CRR, SLR तय करके देश में पैसे की आपूर्ति नियंत्रित करना — महंगाई कम करना या वृद्धि बढ़ाना।
- विदेशी मुद्रा प्रबंधन: FEMA के तहत विदेशी मुद्रा भंडार का प्रबंधन।
मान लो आपके पास Rs.100 जमा हैं। CRR (3%) = Rs.3 नकद RBI के पास रखना अनिवार्य। SLR (25%) = Rs.25 सरकारी प्रतिभूतियों में रखना अनिवार्य। बचे Rs.72 ही आप ऋण दे सकते हैं। इसी तरह RBI पैसों की आपूर्ति नियंत्रित करता है।
🎯 Viva के लिए महत्वपूर्ण
- RBI की स्थापना → RBI Act 1934 से
- RBI का राष्ट्रीयकरण → 1 जनवरी 1949
- Lender of Last Resort = RBI
- Banker to the Government = RBI
- RBI के कार्य: नोट जारी, सरकारी बैंकर, बैंकों का बैंक, मौद्रिक नीति
- Rs.1 का नोट → वित्त मंत्रालय जारी करता है, RBI नहीं
बैंकिंग विनियमन कानून
Banking Regulation Act, 1949
अधिनियम वर्ष: 1949 | पहले: Banking Companies Actउद्देश्य: बैंकिंग कंपनियों को नियंत्रित एवं नियमित करना तथा जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा करना।
🔍 गहन व्याख्या — RBI Act और BR Act में अंतर
RBI Act 1934: यह RBI की स्थापना और उसके कार्यों के बारे में है — यानी "नियामक" के बारे में।
BR Act 1949: यह "नियमित" होने वालों के बारे में है — यानी सभी वाणिज्यिक बैंकों के लिए नियम।
| धारा | प्रावधान और व्याख्या |
|---|---|
| धारा 5(b) | बैंकिंग की परिभाषा — जमा स्वीकार करना + ऋण देना = बैंकिंग। |
| धारा 6 | बैंकिंग कंपनी के अनुमत कार्य — ऋण, गारंटी, Letter of Credit, Safe Deposit Locker आदि। |
| धारा 11 | न्यूनतम पूंजी — बैंक शुरू करने के लिए कम से कम 5 लाख रु. अदत्त पूंजी अनिवार्य। |
| धारा 15 | लाभांश — घाटे में होने पर Dividend नहीं दे सकते। जमाकर्ताओं की सुरक्षा। |
| धारा 17 | भंडार निधि (Reserve Fund) — शुद्ध लाभ का 20% अनिवार्यतः अलग रखना होगा। |
| धारा 18 | CRR — माँग देयताओं का 3% नकद RBI के पास रखना अनिवार्य। |
| धारा 20 | निदेशकों को असुरक्षित ऋण प्रतिबंधित। |
| धारा 21 | RBI ऋण नीति तय कर सकता है — Priority Sector Lending यहीं से। |
| धारा 22 | बैंकिंग के लिए RBI लाइसेंस अनिवार्य। |
| धारा 23 | शाखा खोलने के लिए RBI की अनुमति अनिवार्य। |
| धारा 24 | SLR — 25% (अधिकतम 40%) तरल संपत्ति सरकारी प्रतिभूतियों में। |
| धारा 29 | बैलेंस शीट — प्रत्येक वर्ष 31 मार्च को बनाना अनिवार्य। |
| धारा 35 | RBI द्वारा किसी भी बैंक का निरीक्षण किया जा सकता है। |
| धारा 35-B | प्रबंधन पर RBI का नियंत्रण — CEO नियुक्ति में वीटो। |
| धारा 45 | व्यवसाय का निलंबन — RBI सर्वोच्च न्यायालय की मंजूरी से बैंक को 45 दिन तक बंद कर सकता है। |
🔍 1969 और 1980 का बैंक राष्ट्रीयकरण — क्यों हुआ?
स्वतंत्रता के बाद बड़े उद्योगपति बैंकों पर नियंत्रण रखते थे और किसानों, छोटे व्यापारियों को ऋण नहीं मिलता था।
- 1969: 14 बड़े बैंकों का राष्ट्रीयकरण (Rs.50 करोड़ से अधिक जमा वाले) — गरीबों तक बैंकिंग पहुंचाने का लक्ष्य।
- 1980: 6 और बैंकों का राष्ट्रीयकरण (Rs.200 करोड़ से अधिक जमा वाले)।
🎯 Viva के लिए महत्वपूर्ण
- इस अधिनियम का पुराना नाम = Banking Companies Act
- 1969 में 14 बैंकों का, 1980 में 6 बैंकों का राष्ट्रीयकरण
- सहकारी बैंक भी 1965 के बाद इस अधिनियम के अंतर्गत आते हैं
- Prompt Corrective Action (PCA) — RBI का विशेष उपकरण
- धारा 22 = लाइसेंस | धारा 35 = निरीक्षण | धारा 45 = निलंबन
वाणिज्यिक कानून
Negotiable Instruments Act, 1881
अधिनियम वर्ष: 1881 | संशोधन: 2002, 2015, 2018उद्देश्य: परक्राम्य लिखतों (Negotiable Instruments) — चेक, विनिमय पत्र और वचन पत्र — से संबंधित कानून को परिभाषित करना।
🔍 "Negotiable Instrument" क्या होता है?
Negotiable = हस्तांतरणीय। Instrument = लिखित दस्तावेज।
ऐसा लिखित दस्तावेज जिसे एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को Transfer किया जा सके और जो प्राप्त करने वाले को मूल धारक से भी अधिक अधिकार दे।
| लिखत | परिभाषा / विशेषता |
|---|---|
| Promissory Note (वचन पत्र) | लिखित वादा — निश्चित राशि चुकाने का। 2 पक्ष (Maker + Payee)। धारा 4। |
| Bill of Exchange (विनिमय पत्र) | 3 पक्ष — Drawer, Drawee, Payee। धारा 5। |
| Cheque (चेक) | बैंक पर आहरित विनिमय पत्र — माँग पर तुरंत देय। धारा 6। |
| Holder in Due Course | धारा 9 — उचित मूल्य पर, सद्भावना से प्राप्त धारक को विशेष सुरक्षा। |
| Dishonour of Cheque | धारा 138 — चेक बाउंस = 2 वर्ष कारावास अथवा दोगुना जुर्माना। |
| Notice Period | चेक बाउंस पर 30 दिन का नोटिस, फिर 15 दिन भुगतान का समय। |
| Crossing of Cheque | धारा 123-131 — General, Special, A/C Payee Crossing। |
| Endorsement | धारा 15 — पृष्ठांकन द्वारा हस्तांतरण। |
🔍 तीनों Negotiable Instruments में अंतर
| आधार | Promissory Note | Bill of Exchange | Cheque |
|---|---|---|---|
| पक्षों की संख्या | 2 (Maker + Payee) | 3 (Drawer, Drawee, Payee) | 3 (Drawer, Bank, Payee) |
| Drawee | नहीं होता | कोई भी व्यक्ति | केवल बैंक |
| देय कब | तय समय पर | Acceptance के बाद | माँग पर (On Demand) |
| Stamp Duty | जरूरी | जरूरी | जरूरी नहीं |
| वैधता | 3 वर्ष | तय अवधि | 3 महीने (90 दिन) |
🔍 Cheque Crossing क्यों जरूरी है?
- Open Cheque: कोई भी Counter से कैश ले सकता है — असुरक्षित।
- General Crossing (दो parallel lines): सिर्फ बैंक के माध्यम से ही भुगतान होगा।
- Special Crossing: केवल उस specific बैंक के माध्यम से।
- A/C Payee Crossing: सबसे सुरक्षित — सिर्फ Payee के Account में ही जमा होगा, कैश नहीं।
🎯 Viva के लिए महत्वपूर्ण
- Cheque = Bill of Exchange + बैंक पर आहरित + माँग पर देय
- चेक की वैधता = 3 महीने (90 दिन) — पुराने 6 महीने थे (2012 से बदला)
- A/C Payee Crossing = केवल खाते में जमा — सबसे सुरक्षित
- 2018 संशोधन — अंतरिम मुआवजे का प्रावधान जोड़ा (Interim Compensation)
- Holder in Due Course को विशेष सुरक्षा मिलती है
NPA वसूली कानून
SARFAESI Act, 2002
Securitisation and Reconstruction of Financial Assets and Enforcement of Security Interest Actउद्देश्य: बैंकों को बिना न्यायालय गए NPA (Non-Performing Assets) की वसूली का अधिकार देना।
🔍 SARFAESI से पहले क्या समस्या थी?
पहले यदि कोई व्यक्ति बैंक का ऋण नहीं चुकाता था, तो बैंक को सिविल न्यायालय जाना पड़ता था जहाँ मामला 10-15 वर्ष तक चलता था। Narasimham Committee (1998) ने सुझाव दिया कि बैंकों को बिना कोर्ट गए सम्पत्ति जब्त करने का अधिकार मिलना चाहिए।
📋 SARFAESI प्रक्रिया — चरण दर चरण
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| लागू वर्ष | 2002 (Narasimham Committee की सिफारिश पर) |
| NPA सीमा | 1 लाख रु. से अधिक बकाया पर ही SARFAESI लागू |
| Notice Period | 60 दिन का नोटिस — फिर सम्पत्ति जब्त |
| Securitisation | ऋण को Securities में बदलकर बाजार में बेचना |
| ARCs | Asset Reconstruction Companies — NPA खरीदकर वसूली |
| DRTs | Debt Recovery Tribunals — 10 लाख से अधिक मामले |
| अपील | DRAT में 30 दिन में अपील |
| बाहर क्या है | कृषि भूमि — SARFAESI के दायरे से पूरी तरह बाहर |
🎯 Viva के लिए महत्वपूर्ण
- SARFAESI = बिना कोर्ट के NPA वसूली
- 60 दिन नोटिस → कुर्की → नीलामी
- ARC = Asset Reconstruction Company
- कृषि भूमि — SARFAESI से मुक्त (किसानों की सुरक्षा)
- 2016 संशोधन — MSME ऋण भी शामिल हुए
- Narasimham Committee = SARFAESI की जनक
ऋण वसूली न्यायाधिकरण
Recovery of Debts and Bankruptcy Act, 1993
पहले: Recovery of Debts Due to Banks Act, 1993उद्देश्य: बैंकों एवं वित्तीय संस्थाओं के ऋणों की त्वरित वसूली के लिए विशेष न्यायाधिकरण (DRT) की स्थापना।
🔍 DRT की जरूरत क्यों पड़ी?
1990s में भारतीय बैंकों का NPA बहुत बढ़ गया था। सिविल कोर्ट में ऋण वसूली के मामले 10-20 साल लग जाते थे। Narasimham Committee ने विशेष DRT बनाने की सिफारिश की जो सिर्फ बैंकों के ऋण मामले सुने और 6 महीने में फैसला दे।
SARFAESI = बैंक खुद action लेता है (Court नहीं जाता)
DRT = Tribunal में Case दायर होता है (जज होता है, पर Civil Court से तेज)
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| DRT स्थापना | ऋण वसूली न्यायाधिकरण — विशेष न्यायालय |
| न्यूनतम राशि | 10 लाख रु. से अधिक के मामले DRT में |
| अध्यक्ष | जिला न्यायाधीश स्तर का अधिकारी — Presiding Officer |
| DRAT | Debt Recovery Appellate Tribunal — DRT के फैसले पर अपील |
| समय सीमा | 6 महीने में निर्णय का लक्ष्य |
| Recovery Certificate | DRT द्वारा वसूली प्रमाण पत्र — इससे बैंक सम्पत्ति कुर्क कर सकता है |
SARFAESI का ऋणी अपील करे → DRT → DRAT → High Court
🎯 Viva के लिए महत्वपूर्ण
- DRT = Debt Recovery Tribunal — Rs.10 लाख+ के मामले
- DRAT = Debt Recovery Appellate Tribunal — अपील
- Narasimham Committee की सिफारिश पर स्थापित
- SARFAESI + DRT = दोहरी वसूली व्यवस्था
- 6 महीने में फैसले का लक्ष्य
दिवाला समाधान संहिता
Insolvency and Bankruptcy Code (IBC), 2016
अधिनियम वर्ष: 2016 | क्रांतिकारी सुधारउद्देश्य: दिवालिया कंपनियों एवं व्यक्तियों के लिए एकीकृत एवं समयबद्ध समाधान प्रक्रिया। पहले 12 अलग-अलग कानून थे, IBC ने सबको एकीकृत किया।
🔍 IBC से पहले क्या था?
IBC से पहले SICA, Companies Act, RDBBFI Act जैसे अलग-अलग कानून थे जो एक-दूसरे से टकराते थे। कोई मामला 15-20 वर्ष चलता था।
IBC ने एक ही Code में सब समेट दिया और समय सीमा तय की — 180 दिन (+ 90 दिन = अधिकतम 270 दिन) में समाधान।
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| CIRP समय सीमा | 180 दिन (+ 90 दिन extension) = अधिकतम 270 दिन |
| NCLT | National Company Law Tribunal — मुख्य Adjudicating Authority |
| IRP/RP | Insolvency Resolution Professional — प्रक्रिया संचालक |
| CoC | Committee of Creditors — 66% वोट से Resolution Plan पास |
| IBBI | Insolvency and Bankruptcy Board of India — IRP/RP को regulate करता है |
| Liquidation | समाधान न होने पर परिसमापन — NCLT का आदेश |
| Personal Insolvency | DRT में व्यक्तिगत दिवाला |
| Pre-packaged | 2021 — MSMEs के लिए Pre-pack Insolvency — 120 दिन |
🔍 Waterfall Mechanism — ऋणदाताओं की प्राथमिकता (धारा 53)
🎯 Viva के लिए महत्वपूर्ण
- IBC 2016 = भारत की सबसे बड़ी दिवाला सुधार — 12 कानून एकीकृत
- CIRP = 180 + 90 = अधिकतम 270 दिन
- CoC = ऋणदाताओं की समिति (66% वोट से निर्णय)
- IBBI = Insolvency and Bankruptcy Board of India (नियामक)
- Waterfall: CIRP Cost → Secured → Employees → Unsecured → Govt → Shareholders
वित्तीय अपराध कानून
Prevention of Money Laundering Act (PMLA), 2002
लागू: 1 जुलाई 2005 | संशोधन: 2012, 2019उद्देश्य: काले धन को वैध बनाने (Money Laundering) की प्रक्रिया को रोकना एवं दंडित करना।
🔍 Money Laundering क्या है? — 3 चरण
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| Money Laundering | Placement → Layering → Integration |
| दंड | 3 से 7 वर्ष कारावास (NDPS मामलों में 10 वर्ष तक) |
| जाँच एजेंसी | ED (Enforcement Directorate) |
| FATF | Financial Action Task Force — अंतर्राष्ट्रीय मानक |
| KYC | Know Your Customer — हर बैंक खाते के लिए अनिवार्य |
| STR | Suspicious Transaction Report — FIU को अनिवार्य सूचना |
| CTR | Cash Transaction Report — Rs.10 लाख+ नकद लेनदेन |
| FIU | Financial Intelligence Unit India — STR/CTR की नोडल एजेंसी |
🔍 KYC क्यों जरूरी है?
- CDD (Customer Due Diligence): बेसिक KYC — Aadhaar, PAN, Photo
- EDD (Enhanced Due Diligence): Politically Exposed Persons (PEP), High Risk Countries के लिए अतिरिक्त जाँच
- Periodic KYC Update: High Risk = हर 2 साल | Medium = 8 साल | Low = 10 साल
🎯 Viva के लिए महत्वपूर्ण
- 3 चरण: Placement → Layering → Integration
- ED = Enforcement Directorate (जाँच एजेंसी)
- Rs.10 लाख+ नकद = CTR अनिवार्य
- Hawala = अनौपचारिक मनी ट्रांसफर (PMLA के तहत अपराध)
- Benami Property = PBPT Act 1988 + PMLA दोनों
- FATF = अंतर्राष्ट्रीय मानक निर्धारक (India = FATF Member)
Foreign Exchange Management Act (FEMA), 1999
लागू: 1 जून 2000 | FERA 1973 का स्थानउद्देश्य: विदेशी मुद्रा के प्रबंधन, संरक्षण और उपयोग को सुव्यवस्थित करना। FERA (1973) आपराधिक था; FEMA नागरिक कानून है।
🔍 FERA से FEMA — क्यों बदला?
FERA 1973: कठोर आपराधिक कानून — हर विदेशी मुद्रा लेनदेन के लिए सरकार की अनुमति अनिवार्य।
1991 का उदारीकरण: LPG Policy (Liberalisation, Privatisation, Globalisation) अपनाई। FERA की कठोरता FDI के लिए बाधा थी।
FEMA 1999: उदार नागरिक कानून। Current Account लेनदेन अधिकांश स्वतंत्र।
Current Account = Import/Export का भुगतान — अधिकांश स्वतंत्र
Capital Account = FDI, FII, ECB — RBI अनुमति जरूरी
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| FERA बनाम FEMA | FERA = आपराधिक, कठोर | FEMA = नागरिक कानून, उदार |
| Current Account | व्यापारिक लेनदेन — अधिकांश स्वतंत्र |
| Capital Account | FDI/FII — RBI/सरकार की अनुमति से |
| Authorized Dealer | RBI द्वारा अनुमोदित बैंक जो विदेशी मुद्रा में लेनदेन कर सकते हैं |
| जाँच एजेंसी | ED (Enforcement Directorate) |
| LRS | Liberalised Remittance Scheme — $2,50,000 प्रति वर्ष प्रति व्यक्ति |
| दंड | उल्लंघित राशि का 3 गुना जुर्माना — सिविल, आपराधिक नहीं |
🔍 FDI Routes — Automatic vs Approval
- Automatic Route: पूर्व अनुमति की जरूरत नहीं — बाद में सिर्फ सूचित करना। (Manufacturing, Services आदि)
- Approval Route: पहले DPIIT/Cabinet से अनुमति जरूरी। (Defense, Media आदि)
- Prohibited Sectors: Lottery, Gambling, Chit Funds — FDI नहीं।
🎯 Viva के लिए महत्वपूर्ण
- FEMA = FERA का उदारीकृत संस्करण (1991 सुधारों के बाद)
- FEMA उल्लंघन = दीवानी अपराध — Criminal नहीं
- LRS = $2,50,000 प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष
- FDI नीति — DPIIT द्वारा निर्धारित, RBI FEMA लागू करता है
- Authorized Dealer = विदेशी मुद्रा में लेनदेन करने वाले बैंक
⚡ Quick Revision
सभी अधिनियम — एक नज़र में (Master Table)
| अधिनियम | वर्ष | मुख्य उद्देश्य | नियामक / अधिकरण |
|---|---|---|---|
| NI Act | 1881 | परक्राम्य लिखत — चेक, Bill, Promissory Note | न्यायालय / Magistrate |
| RBI Act | 1934 | केंद्रीय बैंक स्थापना, मौद्रिक नीति, नोट जारी | RBI |
| BR Act | 1949 | बैंकिंग कंपनियों का नियंत्रण, जमाकर्ता सुरक्षा | RBI |
| DRT Act | 1993 | Rs.10 लाख+ ऋण वसूली — विशेष न्यायाधिकरण | DRT / DRAT |
| FEMA | 1999 | विदेशी मुद्रा प्रबंधन — उदार, नागरिक कानून | RBI / ED |
| SARFAESI | 2002 | बिना कोर्ट NPA वसूली — 60 दिन नोटिस | RBI / DRT |
| PMLA | 2002 | मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम — KYC, STR, CTR | ED / FIU |
| IBC | 2016 | दिवाला समाधान — 270 दिन में समयबद्ध | IBBI / NCLT |
📌 परीक्षा में पूछी जाने वाली महत्वपूर्ण संख्याएं
| विषय | संख्या / अवधि |
|---|---|
| CRR (Cash Reserve Ratio) | 3% — नकद RBI के पास |
| SLR (Statutory Liquidity Ratio) | 25% (अधिकतम 40%) — सरकारी प्रतिभूतियां |
| भंडार निधि (Reserve Fund) | 20% शुद्ध लाभ — BR Act धारा 17 |
| CIRP (IBC) | 180 + 90 = 270 दिन अधिकतम |
| DRT न्यूनतम राशि | Rs.10 लाख से अधिक |
| SARFAESI नोटिस | 60 दिन |
| LRS (FEMA) | $2,50,000 प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष |
| चेक वैधता (NI Act) | 3 महीने (90 दिन) |
| CTR सीमा (PMLA) | Rs.10 लाख+ नकद लेनदेन |
| धारा 138 दंड (NI Act) | 2 वर्ष कारावास / दोगुना जुर्माना |
| CoC वोट (IBC) | 66% — Resolution Plan पास के लिए |
| FEMA उल्लंघन दंड | 3 गुना जुर्माना |

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