भारत के प्रमुख बैंकिंग अधिनियम | Banking Acts

भारत के प्रमुख बैंकिंग अधिनियम | Deep Explanation | Hindi Notes 2026
📚 Deep Explanation Notes 2026 | परीक्षा सहायक

भारत के प्रमुख बैंकिंग अधिनियम
सम्पूर्ण गहन व्याख्या हिंदी में

RBI Act 1934, Banking Regulation Act 1949, SARFAESI Act, NI Act, IBC, PMLA, FEMA — सभी अधिनियमों की विस्तृत, उदाहरण-सहित, सरल हिंदी में व्याख्या।

📅 2026 ⏳ पढ़ने का समय: ~30 मिनट 🎓 B.Com / LLB / Bank Exam 🌐 हिंदी माध्यम
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Reserve Bank of India Act, 1934

अधिनियम वर्ष: 1934 | लागू: 1 अप्रैल 1935
केंद्रीय बैंक मौद्रिक नीति मुद्रा नियंत्रण

उद्देश्य: भारत में केंद्रीय बैंक की स्थापना एवं मुद्रा प्रबंधन के लिए बना यह अधिनियम RBI की शक्तियों, कार्यों और दायित्वों को परिभाषित करता है।

🔍 गहन व्याख्या — यह कानून क्यों बना?

1857 से पहले भारत में कई निजी बैंक मुद्रा जारी करते थे जिससे अव्यवस्था थी। 1913 में Hilton Young Commission ने एक केंद्रीय बैंक की सिफारिश की। फिर 1934 में यह अधिनियम पास हुआ और 1 अप्रैल 1935 को RBI की स्थापना कोलकाता में हुई। शुरुआत में यह निजी बैंक था जिसे 1 जनवरी 1949 को राष्ट्रीयकृत किया गया।

💡 सरल उदाहरण: जैसे देश में एक ही केंद्रीय सरकार होती है जो सभी राज्यों को नियंत्रित करती है, उसी प्रकार RBI एकमात्र "बैंकों का बैंक" है जो सभी वाणिज्यिक बैंकों को नियंत्रित करता है।
बिंदुविवरण
स्थापना1 अप्रैल 1935, कोलकाता में मुख्यालय (बाद में मुंबई)
राष्ट्रीयकरण1 जनवरी 1949 को RBI का पूर्ण राष्ट्रीयकरण
पूंजी5 करोड़ रु. — पूर्णतः केंद्र सरकार द्वारा धारित
CRR शक्तिधारा 42 — वाणिज्यिक बैंकों पर CRR लागू करने की शक्ति
नोट जारीधारा 22 — एकमात्र नोट जारी करने का अधिकार (1 रु. छोड़कर)
Repo/Reverse Repoधारा 17 — बैंक दर एवं खुले बाजार परिचालन
विदेशी मुद्रा भंडारFEMA 1999 के साथ समन्वय में प्रबंधन

🔍 RBI के मुख्य कार्य — विस्तार से

  • नोट जारी करना (Issue of Currency): एकमात्र RBI को Rs.2, Rs.5, Rs.10 से लेकर Rs.2000 तक के नोट जारी करने का अधिकार है। Rs.1 का नोट वित्त मंत्रालय जारी करता है।
  • सरकार का बैंकर (Banker to Government): RBI केंद्र और राज्य सरकारों के बैंकिंग कार्य करता है — जैसे कि सरकार की ओर से भुगतान करना और सरकारी ऋण जारी करना।
  • बैंकों का बैंक (Banker's Bank): जब किसी बैंक को पैसों की जरूरत होती है, वह RBI से कर्ज लेता है। इसीलिए RBI को "अंतिम ऋणदाता" (Lender of Last Resort) कहते हैं।
  • मौद्रिक नीति (Monetary Policy): Repo Rate, CRR, SLR तय करके देश में पैसे की आपूर्ति नियंत्रित करना — महंगाई कम करना या वृद्धि बढ़ाना।
  • विदेशी मुद्रा प्रबंधन: FEMA के तहत विदेशी मुद्रा भंडार का प्रबंधन।
💡 CRR और SLR का सरल अर्थ:
मान लो आपके पास Rs.100 जमा हैं। CRR (3%) = Rs.3 नकद RBI के पास रखना अनिवार्य। SLR (25%) = Rs.25 सरकारी प्रतिभूतियों में रखना अनिवार्य। बचे Rs.72 ही आप ऋण दे सकते हैं। इसी तरह RBI पैसों की आपूर्ति नियंत्रित करता है।

🎯 Viva के लिए महत्वपूर्ण

  • RBI की स्थापना → RBI Act 1934 से
  • RBI का राष्ट्रीयकरण → 1 जनवरी 1949
  • Lender of Last Resort = RBI
  • Banker to the Government = RBI
  • RBI के कार्य: नोट जारी, सरकारी बैंकर, बैंकों का बैंक, मौद्रिक नीति
  • Rs.1 का नोट → वित्त मंत्रालय जारी करता है, RBI नहीं
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Banking Regulation Act, 1949

अधिनियम वर्ष: 1949 | पहले: Banking Companies Act
वाणिज्यिक बैंक RBI नियंत्रण लाइसेंसिंग

उद्देश्य: बैंकिंग कंपनियों को नियंत्रित एवं नियमित करना तथा जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा करना।

🔍 गहन व्याख्या — RBI Act और BR Act में अंतर

RBI Act 1934: यह RBI की स्थापना और उसके कार्यों के बारे में है — यानी "नियामक" के बारे में।
BR Act 1949: यह "नियमित" होने वालों के बारे में है — यानी सभी वाणिज्यिक बैंकों के लिए नियम।

💡 सरल उदाहरण: RBI Act = Traffic Police का Constitution (पुलिस कैसे काम करेगी)। BR Act = Traffic Rules (वाहन चालकों के लिए नियम)। दोनों अलग हैं।
धाराप्रावधान और व्याख्या
धारा 5(b)बैंकिंग की परिभाषा — जमा स्वीकार करना + ऋण देना = बैंकिंग।
धारा 6बैंकिंग कंपनी के अनुमत कार्य — ऋण, गारंटी, Letter of Credit, Safe Deposit Locker आदि।
धारा 11न्यूनतम पूंजी — बैंक शुरू करने के लिए कम से कम 5 लाख रु. अदत्त पूंजी अनिवार्य।
धारा 15लाभांश — घाटे में होने पर Dividend नहीं दे सकते। जमाकर्ताओं की सुरक्षा।
धारा 17भंडार निधि (Reserve Fund) — शुद्ध लाभ का 20% अनिवार्यतः अलग रखना होगा।
धारा 18CRR — माँग देयताओं का 3% नकद RBI के पास रखना अनिवार्य।
धारा 20निदेशकों को असुरक्षित ऋण प्रतिबंधित।
धारा 21RBI ऋण नीति तय कर सकता है — Priority Sector Lending यहीं से।
धारा 22बैंकिंग के लिए RBI लाइसेंस अनिवार्य।
धारा 23शाखा खोलने के लिए RBI की अनुमति अनिवार्य।
धारा 24SLR — 25% (अधिकतम 40%) तरल संपत्ति सरकारी प्रतिभूतियों में।
धारा 29बैलेंस शीट — प्रत्येक वर्ष 31 मार्च को बनाना अनिवार्य।
धारा 35RBI द्वारा किसी भी बैंक का निरीक्षण किया जा सकता है।
धारा 35-Bप्रबंधन पर RBI का नियंत्रण — CEO नियुक्ति में वीटो।
धारा 45व्यवसाय का निलंबन — RBI सर्वोच्च न्यायालय की मंजूरी से बैंक को 45 दिन तक बंद कर सकता है।

🔍 1969 और 1980 का बैंक राष्ट्रीयकरण — क्यों हुआ?

स्वतंत्रता के बाद बड़े उद्योगपति बैंकों पर नियंत्रण रखते थे और किसानों, छोटे व्यापारियों को ऋण नहीं मिलता था।

  • 1969: 14 बड़े बैंकों का राष्ट्रीयकरण (Rs.50 करोड़ से अधिक जमा वाले) — गरीबों तक बैंकिंग पहुंचाने का लक्ष्य।
  • 1980: 6 और बैंकों का राष्ट्रीयकरण (Rs.200 करोड़ से अधिक जमा वाले)।
📌 PCA (Prompt Corrective Action): जब कोई बैंक कमजोर हो जाता है (NPA बढ़ने पर), RBI उसे PCA में डालता है — नई शाखाएं खोलने, लाभांश देने पर रोक लगती है।
📌 याद रखें: CRR (3%) = नकद RBI के पास | SLR (25%) = सरकारी प्रतिभूतियां अपने पास | भंडार निधि (20%) = शुद्ध लाभ से अलग रखना

🎯 Viva के लिए महत्वपूर्ण

  • इस अधिनियम का पुराना नाम = Banking Companies Act
  • 1969 में 14 बैंकों का, 1980 में 6 बैंकों का राष्ट्रीयकरण
  • सहकारी बैंक भी 1965 के बाद इस अधिनियम के अंतर्गत आते हैं
  • Prompt Corrective Action (PCA) — RBI का विशेष उपकरण
  • धारा 22 = लाइसेंस | धारा 35 = निरीक्षण | धारा 45 = निलंबन
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Negotiable Instruments Act, 1881

अधिनियम वर्ष: 1881 | संशोधन: 2002, 2015, 2018
चेक विनिमय पत्र वचन पत्र

उद्देश्य: परक्राम्य लिखतों (Negotiable Instruments) — चेक, विनिमय पत्र और वचन पत्र — से संबंधित कानून को परिभाषित करना।

🔍 "Negotiable Instrument" क्या होता है?

Negotiable = हस्तांतरणीय। Instrument = लिखित दस्तावेज।

ऐसा लिखित दस्तावेज जिसे एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को Transfer किया जा सके और जो प्राप्त करने वाले को मूल धारक से भी अधिक अधिकार दे।

💡 उदाहरण: राम ने श्याम को Rs.10,000 का चेक दिया। श्याम ने वह चेक मोहन को Transfer कर दिया (Endorsement द्वारा)। मोहन को अब वह चेक बैंक से कैश करने का पूरा अधिकार है — यही Negotiability है।
लिखतपरिभाषा / विशेषता
Promissory Note (वचन पत्र)लिखित वादा — निश्चित राशि चुकाने का। 2 पक्ष (Maker + Payee)। धारा 4।
Bill of Exchange (विनिमय पत्र)3 पक्ष — Drawer, Drawee, Payee। धारा 5।
Cheque (चेक)बैंक पर आहरित विनिमय पत्र — माँग पर तुरंत देय। धारा 6।
Holder in Due Courseधारा 9 — उचित मूल्य पर, सद्भावना से प्राप्त धारक को विशेष सुरक्षा।
Dishonour of Chequeधारा 138 — चेक बाउंस = 2 वर्ष कारावास अथवा दोगुना जुर्माना।
Notice Periodचेक बाउंस पर 30 दिन का नोटिस, फिर 15 दिन भुगतान का समय।
Crossing of Chequeधारा 123-131 — General, Special, A/C Payee Crossing।
Endorsementधारा 15 — पृष्ठांकन द्वारा हस्तांतरण।

🔍 तीनों Negotiable Instruments में अंतर

आधारPromissory NoteBill of ExchangeCheque
पक्षों की संख्या2 (Maker + Payee)3 (Drawer, Drawee, Payee)3 (Drawer, Bank, Payee)
Draweeनहीं होताकोई भी व्यक्तिकेवल बैंक
देय कबतय समय परAcceptance के बादमाँग पर (On Demand)
Stamp Dutyजरूरीजरूरीजरूरी नहीं
वैधता3 वर्षतय अवधि3 महीने (90 दिन)

🔍 Cheque Crossing क्यों जरूरी है?

  • Open Cheque: कोई भी Counter से कैश ले सकता है — असुरक्षित।
  • General Crossing (दो parallel lines): सिर्फ बैंक के माध्यम से ही भुगतान होगा।
  • Special Crossing: केवल उस specific बैंक के माध्यम से।
  • A/C Payee Crossing: सबसे सुरक्षित — सिर्फ Payee के Account में ही जमा होगा, कैश नहीं।
💡 व्यावहारिक: बड़ी रकम का चेक देते समय हमेशा "A/C Payee" लिखें — चेक खो जाने पर भी कोई दूसरा कैश नहीं कर सकता।
⚠ धारा 138 — चेक बाउंस (महत्वपूर्ण!) अपर्याप्त धनराशि, हस्ताक्षर का मेल न खाना, या खाता बंद होने से चेक अस्वीकृत हो → बैंक Memo देगा → 30 दिन में Legal Notice भेजें → 15 दिन में भुगतान नहीं → 1 माह में Magistrate Court में शिकायत → 2 वर्ष कारावास / दोगुना जुर्माना।

🎯 Viva के लिए महत्वपूर्ण

  • Cheque = Bill of Exchange + बैंक पर आहरित + माँग पर देय
  • चेक की वैधता = 3 महीने (90 दिन) — पुराने 6 महीने थे (2012 से बदला)
  • A/C Payee Crossing = केवल खाते में जमा — सबसे सुरक्षित
  • 2018 संशोधन — अंतरिम मुआवजे का प्रावधान जोड़ा (Interim Compensation)
  • Holder in Due Course को विशेष सुरक्षा मिलती है
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SARFAESI Act, 2002

Securitisation and Reconstruction of Financial Assets and Enforcement of Security Interest Act
NPA वसूली सम्पत्ति कुर्की ARCs

उद्देश्य: बैंकों को बिना न्यायालय गए NPA (Non-Performing Assets) की वसूली का अधिकार देना।

🔍 SARFAESI से पहले क्या समस्या थी?

पहले यदि कोई व्यक्ति बैंक का ऋण नहीं चुकाता था, तो बैंक को सिविल न्यायालय जाना पड़ता था जहाँ मामला 10-15 वर्ष तक चलता था। Narasimham Committee (1998) ने सुझाव दिया कि बैंकों को बिना कोर्ट गए सम्पत्ति जब्त करने का अधिकार मिलना चाहिए।

💡 NPA क्या है? यदि ऋण पर 90 दिनों से अधिक समय तक कोई किस्त नहीं आई, तो वह ऋण Non-Performing Asset (NPA) बन जाता है।

📋 SARFAESI प्रक्रिया — चरण दर चरण

1
NPA घोषणा: 90 दिन से किस्त नहीं आई → बैंक ऋण को NPA घोषित करता है
2
60 दिन नोटिस: बैंक ऋणी को 60 दिन का नोटिस देता है
3
सम्पत्ति कुर्की: 60 दिन बाद भी भुगतान नहीं → बिना कोर्ट गए बैंक सम्पत्ति अपने नाम कर सकता है
4
नीलामी: सम्पत्ति की सार्वजनिक नीलामी → बैंक का ऋण वसूल
5
अपील: ऋणी को आपत्ति हो → DRT में 45 दिन के भीतर अपील
बिंदुविवरण
लागू वर्ष2002 (Narasimham Committee की सिफारिश पर)
NPA सीमा1 लाख रु. से अधिक बकाया पर ही SARFAESI लागू
Notice Period60 दिन का नोटिस — फिर सम्पत्ति जब्त
Securitisationऋण को Securities में बदलकर बाजार में बेचना
ARCsAsset Reconstruction Companies — NPA खरीदकर वसूली
DRTsDebt Recovery Tribunals — 10 लाख से अधिक मामले
अपीलDRAT में 30 दिन में अपील
बाहर क्या हैकृषि भूमि — SARFAESI के दायरे से पूरी तरह बाहर
🤡 ARC (Asset Reconstruction Company) क्या करती है? मान लो बैंक का Rs.1 करोड़ का NPA है। ARC इसे Rs.60 लाख में खरीद लेती है। अब ARC खुद ऋणी से वसूली करती है। बैंक को नुकसान में Rs.40 लाख मिले, पर झंझट से मुक्ति। ARC को यदि Rs.80 लाख मिलें तो उसे Rs.20 लाख का लाभ — यह है ARC का व्यवसाय मॉडल।

🎯 Viva के लिए महत्वपूर्ण

  • SARFAESI = बिना कोर्ट के NPA वसूली
  • 60 दिन नोटिस → कुर्की → नीलामी
  • ARC = Asset Reconstruction Company
  • कृषि भूमि — SARFAESI से मुक्त (किसानों की सुरक्षा)
  • 2016 संशोधन — MSME ऋण भी शामिल हुए
  • Narasimham Committee = SARFAESI की जनक

Recovery of Debts and Bankruptcy Act, 1993

पहले: Recovery of Debts Due to Banks Act, 1993

उद्देश्य: बैंकों एवं वित्तीय संस्थाओं के ऋणों की त्वरित वसूली के लिए विशेष न्यायाधिकरण (DRT) की स्थापना।

🔍 DRT की जरूरत क्यों पड़ी?

1990s में भारतीय बैंकों का NPA बहुत बढ़ गया था। सिविल कोर्ट में ऋण वसूली के मामले 10-20 साल लग जाते थे। Narasimham Committee ने विशेष DRT बनाने की सिफारिश की जो सिर्फ बैंकों के ऋण मामले सुने और 6 महीने में फैसला दे।

💡 DRT और SARFAESI में अंतर:
SARFAESI = बैंक खुद action लेता है (Court नहीं जाता)
DRT = Tribunal में Case दायर होता है (जज होता है, पर Civil Court से तेज)
बिंदुविवरण
DRT स्थापनाऋण वसूली न्यायाधिकरण — विशेष न्यायालय
न्यूनतम राशि10 लाख रु. से अधिक के मामले DRT में
अध्यक्षजिला न्यायाधीश स्तर का अधिकारी — Presiding Officer
DRATDebt Recovery Appellate Tribunal — DRT के फैसले पर अपील
समय सीमा6 महीने में निर्णय का लक्ष्य
Recovery CertificateDRT द्वारा वसूली प्रमाण पत्र — इससे बैंक सम्पत्ति कुर्क कर सकता है
🤡 DRT ढांचा — एक नज़र में DRT → DRAT → High Court → Supreme Court

SARFAESI का ऋणी अपील करे → DRT → DRAT → High Court

🎯 Viva के लिए महत्वपूर्ण

  • DRT = Debt Recovery Tribunal — Rs.10 लाख+ के मामले
  • DRAT = Debt Recovery Appellate Tribunal — अपील
  • Narasimham Committee की सिफारिश पर स्थापित
  • SARFAESI + DRT = दोहरी वसूली व्यवस्था
  • 6 महीने में फैसले का लक्ष्य
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Insolvency and Bankruptcy Code (IBC), 2016

अधिनियम वर्ष: 2016 | क्रांतिकारी सुधार
दिवाला समाधान NCLT 180 दिन

उद्देश्य: दिवालिया कंपनियों एवं व्यक्तियों के लिए एकीकृत एवं समयबद्ध समाधान प्रक्रिया। पहले 12 अलग-अलग कानून थे, IBC ने सबको एकीकृत किया।

🔍 IBC से पहले क्या था?

IBC से पहले SICA, Companies Act, RDBBFI Act जैसे अलग-अलग कानून थे जो एक-दूसरे से टकराते थे। कोई मामला 15-20 वर्ष चलता था।

IBC ने एक ही Code में सब समेट दिया और समय सीमा तय की — 180 दिन (+ 90 दिन = अधिकतम 270 दिन) में समाधान।

💡 सरल उदाहरण: ABC Ltd पर बैंक का Rs.500 करोड़ बकाया है, कंपनी दिवालिया हो गई। IBC के तहत NCLT में Application → IRP नियुक्त → 180 दिन में नया Resolution Plan → अगर नहीं तो Liquidation।
बिंदुविवरण
CIRP समय सीमा180 दिन (+ 90 दिन extension) = अधिकतम 270 दिन
NCLTNational Company Law Tribunal — मुख्य Adjudicating Authority
IRP/RPInsolvency Resolution Professional — प्रक्रिया संचालक
CoCCommittee of Creditors — 66% वोट से Resolution Plan पास
IBBIInsolvency and Bankruptcy Board of India — IRP/RP को regulate करता है
Liquidationसमाधान न होने पर परिसमापन — NCLT का आदेश
Personal InsolvencyDRT में व्यक्तिगत दिवाला
Pre-packaged2021 — MSMEs के लिए Pre-pack Insolvency — 120 दिन

🔍 Waterfall Mechanism — ऋणदाताओं की प्राथमिकता (धारा 53)

1
CIRP लागत — प्रक्रिया का खर्च सबसे पहले
2
सुरक्षित ऋणदाता — Secured Creditors (बैंक)
3
कर्मचारी वेतन — 24 महीने तक का बकाया वेतन
4
असुरक्षित ऋणदाता — Unsecured Creditors
5
सरकारी बकाया — Tax, GST आदि
6
शेयरधारक — सबसे अंत में
⚠ महत्वपूर्ण — Moratorium Period CIRP शुरू होते ही Moratorium लागू होता है — इस दौरान कोई भी कंपनी की संपत्ति नहीं छू सकता, कोई मुकदमा नहीं, कोई Recovery Action नहीं।

🎯 Viva के लिए महत्वपूर्ण

  • IBC 2016 = भारत की सबसे बड़ी दिवाला सुधार — 12 कानून एकीकृत
  • CIRP = 180 + 90 = अधिकतम 270 दिन
  • CoC = ऋणदाताओं की समिति (66% वोट से निर्णय)
  • IBBI = Insolvency and Bankruptcy Board of India (नियामक)
  • Waterfall: CIRP Cost → Secured → Employees → Unsecured → Govt → Shareholders
🔍

Prevention of Money Laundering Act (PMLA), 2002

लागू: 1 जुलाई 2005 | संशोधन: 2012, 2019
KYC मनी लॉन्ड्रिंग ED जाँच

उद्देश्य: काले धन को वैध बनाने (Money Laundering) की प्रक्रिया को रोकना एवं दंडित करना।

🔍 Money Laundering क्या है? — 3 चरण

1
Placement (प्रवेश): काला धन पहली बार वित्तीय प्रणाली में डाला जाता है — नकद जमा, Hawala, काल्पनिक व्यापार।
2
Layering (परतें): पैसे की उत्पत्ति छुपाने के लिए अनेक Transaction — offshore accounts, shell companies।
3
Integration (एकीकरण): काला धन "वैध" दिखने वाली संपत्ति में बदल जाता है — रियल एस्टेट, luxury goods।
💡 उदाहरण: रमेश ने रिश्वत में Rs.1 करोड़ नकद लिया (काला धन)। उसने fake NGO में डाला (Placement), 20 छोटे Accounts में बाँटा (Layering), दुकान खरीदी और किराया दिखाया (Integration)। अब पैसा "वैध" दिखता है — यही Money Laundering है।
बिंदुविवरण
Money LaunderingPlacement → Layering → Integration
दंड3 से 7 वर्ष कारावास (NDPS मामलों में 10 वर्ष तक)
जाँच एजेंसीED (Enforcement Directorate)
FATFFinancial Action Task Force — अंतर्राष्ट्रीय मानक
KYCKnow Your Customer — हर बैंक खाते के लिए अनिवार्य
STRSuspicious Transaction Report — FIU को अनिवार्य सूचना
CTRCash Transaction Report — Rs.10 लाख+ नकद लेनदेन
FIUFinancial Intelligence Unit India — STR/CTR की नोडल एजेंसी

🔍 KYC क्यों जरूरी है?

  • CDD (Customer Due Diligence): बेसिक KYC — Aadhaar, PAN, Photo
  • EDD (Enhanced Due Diligence): Politically Exposed Persons (PEP), High Risk Countries के लिए अतिरिक्त जाँच
  • Periodic KYC Update: High Risk = हर 2 साल | Medium = 8 साल | Low = 10 साल
💡 Hawala: बिना भौतिक पैसे के Transfer — दिल्ली में Rs.1 लाख दो, दुबई में Equivalent मिलेगा। PMLA और FEMA दोनों के तहत अपराध।

🎯 Viva के लिए महत्वपूर्ण

  • 3 चरण: Placement → Layering → Integration
  • ED = Enforcement Directorate (जाँच एजेंसी)
  • Rs.10 लाख+ नकद = CTR अनिवार्य
  • Hawala = अनौपचारिक मनी ट्रांसफर (PMLA के तहत अपराध)
  • Benami Property = PBPT Act 1988 + PMLA दोनों
  • FATF = अंतर्राष्ट्रीय मानक निर्धारक (India = FATF Member)
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Foreign Exchange Management Act (FEMA), 1999

लागू: 1 जून 2000 | FERA 1973 का स्थान
विदेशी मुद्रा FDI RBI नियंत्रण

उद्देश्य: विदेशी मुद्रा के प्रबंधन, संरक्षण और उपयोग को सुव्यवस्थित करना। FERA (1973) आपराधिक था; FEMA नागरिक कानून है।

🔍 FERA से FEMA — क्यों बदला?

FERA 1973: कठोर आपराधिक कानून — हर विदेशी मुद्रा लेनदेन के लिए सरकार की अनुमति अनिवार्य।

1991 का उदारीकरण: LPG Policy (Liberalisation, Privatisation, Globalisation) अपनाई। FERA की कठोरता FDI के लिए बाधा थी।

FEMA 1999: उदार नागरिक कानून। Current Account लेनदेन अधिकांश स्वतंत्र।

💡 Current vs Capital Account:
Current Account = Import/Export का भुगतान — अधिकांश स्वतंत्र
Capital Account = FDI, FII, ECB — RBI अनुमति जरूरी
बिंदुविवरण
FERA बनाम FEMAFERA = आपराधिक, कठोर | FEMA = नागरिक कानून, उदार
Current Accountव्यापारिक लेनदेन — अधिकांश स्वतंत्र
Capital AccountFDI/FII — RBI/सरकार की अनुमति से
Authorized DealerRBI द्वारा अनुमोदित बैंक जो विदेशी मुद्रा में लेनदेन कर सकते हैं
जाँच एजेंसीED (Enforcement Directorate)
LRSLiberalised Remittance Scheme — $2,50,000 प्रति वर्ष प्रति व्यक्ति
दंडउल्लंघित राशि का 3 गुना जुर्माना — सिविल, आपराधिक नहीं

🔍 FDI Routes — Automatic vs Approval

  • Automatic Route: पूर्व अनुमति की जरूरत नहीं — बाद में सिर्फ सूचित करना। (Manufacturing, Services आदि)
  • Approval Route: पहले DPIIT/Cabinet से अनुमति जरूरी। (Defense, Media आदि)
  • Prohibited Sectors: Lottery, Gambling, Chit Funds — FDI नहीं।
💡 LRS उदाहरण: बच्चे को विदेश में पढ़ाई के लिए LRS Scheme के तहत प्रति वर्ष $2,50,000 तक भेज सकते हैं। इससे अधिक के लिए RBI की विशेष अनुमति।

🎯 Viva के लिए महत्वपूर्ण

  • FEMA = FERA का उदारीकृत संस्करण (1991 सुधारों के बाद)
  • FEMA उल्लंघन = दीवानी अपराध — Criminal नहीं
  • LRS = $2,50,000 प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष
  • FDI नीति — DPIIT द्वारा निर्धारित, RBI FEMA लागू करता है
  • Authorized Dealer = विदेशी मुद्रा में लेनदेन करने वाले बैंक
1881
NI Act
चेक, विनिमय पत्र, वचन पत्र
1934
RBI Act
केंद्रीय बैंक की स्थापना
1949
BR Act
बैंकिंग विनियमन
1993
DRT Act
ऋण वसूली न्यायाधिकरण
1999
FEMA
विदेशी मुद्रा प्रबंधन
2002
SARFAESI
NPA वसूली बिना कोर्ट
2002
PMLA
मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम
2016
IBC
दिवाला समाधान संहिता
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सभी अधिनियम — एक नज़र में (Master Table)

अधिनियमवर्षमुख्य उद्देश्यनियामक / अधिकरण
NI Act1881परक्राम्य लिखत — चेक, Bill, Promissory Noteन्यायालय / Magistrate
RBI Act1934केंद्रीय बैंक स्थापना, मौद्रिक नीति, नोट जारीRBI
BR Act1949बैंकिंग कंपनियों का नियंत्रण, जमाकर्ता सुरक्षाRBI
DRT Act1993Rs.10 लाख+ ऋण वसूली — विशेष न्यायाधिकरणDRT / DRAT
FEMA1999विदेशी मुद्रा प्रबंधन — उदार, नागरिक कानूनRBI / ED
SARFAESI2002बिना कोर्ट NPA वसूली — 60 दिन नोटिसRBI / DRT
PMLA2002मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम — KYC, STR, CTRED / FIU
IBC2016दिवाला समाधान — 270 दिन में समयबद्धIBBI / NCLT

📌 परीक्षा में पूछी जाने वाली महत्वपूर्ण संख्याएं

विषयसंख्या / अवधि
CRR (Cash Reserve Ratio)3% — नकद RBI के पास
SLR (Statutory Liquidity Ratio)25% (अधिकतम 40%) — सरकारी प्रतिभूतियां
भंडार निधि (Reserve Fund)20% शुद्ध लाभ — BR Act धारा 17
CIRP (IBC)180 + 90 = 270 दिन अधिकतम
DRT न्यूनतम राशिRs.10 लाख से अधिक
SARFAESI नोटिस60 दिन
LRS (FEMA)$2,50,000 प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष
चेक वैधता (NI Act)3 महीने (90 दिन)
CTR सीमा (PMLA)Rs.10 लाख+ नकद लेनदेन
धारा 138 दंड (NI Act)2 वर्ष कारावास / दोगुना जुर्माना
CoC वोट (IBC)66% — Resolution Plan पास के लिए
FEMA उल्लंघन दंड3 गुना जुर्माना
📢 अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। कानूनी सलाह के लिए किसी योग्य वकील से परामर्श करें।

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