महमूद गजनवी
B.A. Semester-II · प्राचीन भारतीय इतिहास · Mahmud Ghaznavi — 17 आक्रमण
महमूद गजनवी भारतीय इतिहास का एक ऐसा नाम है जो विध्वंस और लूट का पर्याय बन गया। अफगानिस्तान के गजनी का यह शासक 1000 ई. से 1027 ई. के बीच 17 बार भारत पर आया और अपार धन-सम्पदा लूटकर वापस गया। सोमनाथ मन्दिर पर उसका आक्रमण और उसकी लूट भारतीय इतिहास की सबसे दुखद घटनाओं में से एक है। परन्तु ऐतिहासिक दृष्टि से महमूद के आक्रमणों ने भारत के राजनीतिक और सांस्कृतिक इतिहास को गहरे रूप से प्रभावित किया।
महमूद गजनी के शासक सुबुक्तगीन का पुत्र था। उसने 998 ई. में अपने पिता के बाद गजनी का राज्य संभाला। महमूद एक महत्त्वाकांक्षी, साहसी और क्रूर योद्धा था। उसने अपने साम्राज्य का विस्तार ईरान, मध्य एशिया और भारत तक किया। बगदाद के खलीफा ने उसे "सुल्तान" की उपाधि दी — यह उपाधि पहली बार किसी मुस्लिम शासक को दी गई थी।
महमूद के भारत आक्रमण के पीछे कई उद्देश्य थे। धन-लूट सबसे प्रमुख उद्देश्य था — भारत के समृद्ध मन्दिर उसके लिए सोने की खान थे। धार्मिक उद्देश्य — "गाजी" (काफिरों से युद्ध करने वाला) की उपाधि पाना। राजनीतिक उद्देश्य — अपने साम्राज्य को समृद्ध करना और मध्य एशिया में शक्तिशाली बनना।
| वर्ष | आक्रमण | परिणाम |
|---|---|---|
| 1000 ई. | प्रथम आक्रमण — सीमावर्ती क्षेत्र | प्रारम्भिक सफलता |
| 1001 ई. | पेशावर का युद्ध — राजा जयपाल से | जयपाल पराजित; जयपाल ने आत्मदाह किया |
| 1008 ई. | वैहिन्द का युद्ध — आनन्दपाल से | आनन्दपाल पराजित; पंजाब पर अधिकार |
| 1014 ई. | थानेसर पर आक्रमण | भारी लूट |
| 1018 ई. | मथुरा और कन्नौज पर आक्रमण | मन्दिरों का विध्वंस; भारी लूट |
| 1025 ई. | सोमनाथ मन्दिर पर आक्रमण | मन्दिर लूटा और तोड़ा; अपार धन लूटा |
| 1027 ई. | अन्तिम आक्रमण — जाटों पर | अन्तिम भारत यात्रा |
महमूद गजनवी का सबसे कुख्यात आक्रमण 1025 ई. में गुजरात के सोमनाथ मन्दिर पर था। यह मन्दिर भगवान शिव को समर्पित था और उस समय भारत के सबसे धनी और पवित्र मन्दिरों में से एक था। मन्दिर में 50,000 से अधिक सोने के आभूषण थे और हजारों नंदीदीपों में घी जलता था। महमूद ने मन्दिर के मुख्य शिवलिंग को तोड़ा और अपार सोना-चाँदी लूटकर गजनी ले गया। इस आक्रमण में हजारों हिन्दुओं की मृत्यु हुई।
महमूद के आक्रमणों का भारत पर गहरा प्रभाव पड़ा। आर्थिक दृष्टि से अपार धन-सम्पदा लूटी गई। राजनीतिक दृष्टि से पंजाब गजनवी साम्राज्य का हिस्सा बन गया। सांस्कृतिक दृष्टि से अनेक मन्दिर नष्ट हुए परन्तु भारतीय धर्म और संस्कृति समाप्त नहीं हुई। ऐतिहासिक दृष्टि से अलबरूनी की "किताब-उल-हिन्द" एक अमूल्य ऐतिहासिक दस्तावेज बनी।
मुहम्मद गोरी
B.A. Semester-II · प्राचीन भारतीय इतिहास · Muhammad Gauri — भारत में मुस्लिम राज्य का संस्थापक
मुहम्मद गोरी भारतीय इतिहास में एक निर्णायक मोड़ का प्रतीक है। यदि महमूद गजनवी लुटेरा था तो मुहम्मद गोरी विजेता था — उसने भारत में न केवल लूटा बल्कि स्थायी मुस्लिम राज्य की नींव रखी। तराइन के द्वितीय युद्ध (1192 ई.) में पृथ्वीराज चौहान की पराजय ने उत्तर भारत के इतिहास की दिशा बदल दी और दिल्ली सल्तनत की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया।
मुहम्मद गोरी (शिहाब-उद-दीन मुहम्मद) अफगानिस्तान के गोर प्रदेश का शासक था। उसने 1173 ई. में अपने भाई गयास-उद-दीन के साथ मिलकर गोर की सत्ता संभाली। भाई का साथ मिलने से मुहम्मद पूर्व (भारत) की ओर विस्तार करने में सफल रहा जबकि गयास-उद-दीन पश्चिम में।
मुहम्मद गोरी ने 1175 ई. में भारत पर प्रथम आक्रमण किया। उसने मुलतान और सिन्ध पर अधिकार किया। 1178 ई. में उसने गुजरात पर आक्रमण किया परन्तु गुजरात के चालुक्य राजा मूलराज द्वितीय ने उसे "आबू के युद्ध" में पराजित किया। यह मुहम्मद गोरी की पहली बड़ी पराजय थी।
1191 ई. में मुहम्मद गोरी और पृथ्वीराज चौहान के बीच तराइन (करनाल के पास, हरियाणा) में पहला युद्ध हुआ। पृथ्वीराज चौहान की सेना ने अरब, तुर्क और अफगान सेना को बुरी तरह पराजित किया। मुहम्मद गोरी स्वयं घायल हो गया और उसके साथी उसे युद्धभूमि से निकाल ले गए। यह पृथ्वीराज की महान विजय थी।
1191 की पराजय का बदला लेने के लिए मुहम्मद गोरी 1192 ई. में एक विशाल और अनुशासित सेना लेकर फिर आया। तराइन के द्वितीय युद्ध में पृथ्वीराज चौहान पराजित हुए। इस युद्ध में गोरी ने एक चतुर रणनीति अपनाई — उसने पृथ्वीराज की भारी हस्ति-सेना पर सीधे आक्रमण करने के बजाय घुड़सवारों से चारों ओर से घेर कर बाण-वर्षा की। पृथ्वीराज के हाथी भड़क गए और उनकी सेना में अव्यवस्था फैल गई।
तराइन की विजय के बाद मुहम्मद गोरी ने अपने दास और सेनापति कुतुब-उद-दीन ऐबक को भारत का प्रशासन सौंपा। ऐबक ने दिल्ली, अजमेर और अन्य क्षेत्रों पर अधिकार किया। 1206 ई. में मुहम्मद गोरी की हत्या हो गई। उसकी मृत्यु के बाद ऐबक ने दिल्ली सल्तनत की स्थापना की।
| युद्ध | वर्ष | परिणाम |
|---|---|---|
| आबू का युद्ध | 1178 ई. | गोरी पराजित (गुजरात से) |
| तराइन प्रथम | 1191 ई. | पृथ्वीराज की विजय |
| तराइन द्वितीय | 1192 ई. | गोरी की विजय — भारत में मुस्लिम राज्य |
| चन्दावर का युद्ध | 1194 ई. | कन्नौज के राजा जयचन्द पराजित |
महमूद गजनवी और मुहम्मद गोरी — दोनों ने भारतीय इतिहास को गहरे रूप से प्रभावित किया। महमूद लुटेरा था जो हर बार लूटकर वापस चला जाता था, परन्तु मुहम्मद गोरी विजेता था जिसने भारत में स्थायी मुस्लिम राज्य की नींव रखी। तराइन का द्वितीय युद्ध भारतीय इतिहास का सबसे निर्णायक युद्ध था जिसने मध्यकालीन भारत के इतिहास की दिशा बदल दी। दिल्ली सल्तनत और मुगल साम्राज्य — दोनों की जड़ें इसी युद्ध में हैं।

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