भारत में अरब आक्रमण
B.A. Semester-II · प्राचीन भारतीय इतिहास · Arab Invasion in India
भारत में अरब आक्रमण का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण अध्याय 712 ई. में मुहम्मद बिन कासिम के सिन्ध पर आक्रमण से प्रारम्भ होता है। यह भारतीय उपमहाद्वीप में इस्लाम का प्रथम स्थायी सैनिक आगमन था। यद्यपि अरबों ने सिन्ध और मुलतान पर अधिकार कर लिया, तथापि वे भारत के अन्य भागों में प्रवेश नहीं कर सके। इसके पीछे गुर्जर-प्रतिहारों और अन्य राजपूत शासकों का सशक्त प्रतिरोध था।
7वीं शताब्दी में अरब प्रायद्वीप में इस्लाम धर्म का उदय हुआ। पैगम्बर मुहम्मद (570–632 ई.) के नेतृत्व में अरबों ने न केवल अरब प्रायद्वीप बल्कि ईरान, इराक, सीरिया, मिस्र और उत्तरी अफ्रीका पर भी विजय प्राप्त की। 7वीं शताब्दी के अन्त तक अरब साम्राज्य विश्व की सबसे बड़ी शक्ति बन चुका था।
भारत के सिन्ध प्रान्त पर अरब आक्रमण के कई कारण थे। प्रत्यक्ष कारण यह था कि सिन्ध के राजा दाहिर के समुद्री लुटेरों ने अरब जहाजों को लूटा था। इराक के अरब गवर्नर हज्जाज बिन यूसुफ ने इसका बदला लेने का निर्णय किया। व्यापारिक कारण भी थे — सिन्ध नदी के व्यापार पर नियंत्रण पाना। धार्मिक कारण — "जिहाद" की भावना और इस्लाम के प्रसार की इच्छा।
हज्जाज बिन यूसुफ ने अपने भतीजे और दामाद मुहम्मद बिन कासिम को 17 वर्ष की आयु में सेना लेकर भारत भेजा। मुहम्मद बिन कासिम ने देबल (कराची के पास) पर आक्रमण किया और उसे जीत लिया।
सिन्ध का राजा दाहिर एक ब्राह्मण था। उसने अरब आक्रमण का वीरतापूर्वक सामना किया। 712 ई. में रावर के युद्ध में दाहिर वीरगति को प्राप्त हुआ। उसकी पत्नी और पुत्रों ने भी अरबों से संघर्ष जारी रखा परन्तु अन्ततः सिन्ध और मुलतान पर अरबों का अधिकार हो गया।
सिन्ध जीतने के बाद अरबों ने आगे बढ़ने का प्रयास किया परन्तु उन्हें राजपूत शासकों के कठोर प्रतिरोध का सामना करना पड़ा। गुर्जर-प्रतिहार राजा नागभट्ट प्रथम और जुनैद के बीच 730 ई. में युद्ध हुआ जिसमें अरबों को पराजित होना पड़ा। इसके बाद अरब भारत के आन्तरिक भागों में प्रवेश नहीं कर सके।
| क्षेत्र | परिणाम |
|---|---|
| राजनीतिक | सिन्ध और मुलतान पर अरब अधिकार; शेष भारत स्वतन्त्र रहा |
| धार्मिक | सिन्ध में इस्लाम का प्रथम स्थायी प्रसार |
| व्यापारिक | अरब व्यापारी भारत में अधिक सक्रिय हुए |
| सांस्कृतिक | अरबी और भारतीय संस्कृतियों का प्रथम मिलन |
| ज्ञान-विज्ञान | भारतीय गणित और खगोल अरब जगत तक पहुँचे |
मुहम्मद बिन कासिम ने सिन्ध में अपेक्षाकृत उदार नीति अपनाई। उसने हिन्दुओं और बौद्धों को अपने धर्म का पालन करने की छूट दी। मन्दिरों को नष्ट नहीं किया गया। स्थानीय प्रशासकों को उनके पदों पर बनाए रखा गया। ये "जिम्मी" (अहल-अल-जिम्मा — संरक्षित लोग) कहलाए। जज्या (धार्मिक कर) देने की शर्त पर उन्हें धार्मिक स्वतन्त्रता दी गई।
भारत में अरब आक्रमण एक महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना है। यह भारत में इस्लाम के स्थायी राजनीतिक उपस्थिति का प्रारम्भ था। परन्तु राजपूत शासकों के प्रबल प्रतिरोध के कारण अरब भारत के आन्तरिक भागों में प्रवेश नहीं कर सके। सिन्ध और मुलतान तक ही उनकी विजय सीमित रही। इस प्रकार भारत के राजपूत शासकों ने एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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